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DNA ANALYSIS: देश के वो जांबाज नायक, जिनकी रगों में दौड़ता है देशभक्ति का ‘नशा’


आज लॉकडाउन (Lockdown) में रियायत का पहला दिन है. लेकिन क्या आपने जानते हैं कि लोगों ने इस राहत का ज्यादातर समय कहां बिताया? इसका जवाब है शराब की दुकानों के सामने. यानी राहत के पहले दिन के टेस्ट में ही भारत फेल हो गया. कल सुबह से लेकर आज शाम तक जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में सुरक्षा बलों के 8 जवान शहीद हो चुके हैं. लेकिन हमारे देश में इन जवानों की शहादत पर कोई चर्चा नहीं कर रहा. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहा करते थे कि शराब किसी व्यक्ति से सिर्फ उसका पैसा नहीं बल्कि उसकी बुद्धि भी छीन लेती है. लेकिन महात्मा गांधी के इस देश को आज इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता. आज देश के हजारों लोगों ने पूरा दिन शराब की दुकानों के सामने खड़े होकर बिताया. 
जब देश को बहादुर सैनिकों की शहादत का मातम मनाना चाहिए था, तब लाखों लोग मीलों लंबी लाइनों में लगकर एक बोतल शराब मिल जाने का इंतजार कर रहे थे. ये बड़े दुख का विषय है और इसीलिए आज इस पर चर्चा करना बहुत जरूरी है. 

भारत में मोटे तौर पर आपको दो तरह के लोग दिखाई देंगे, पहले वो जिनकी रगों में देशभक्ति का नशा दौड़ता है और दूसरे वो जिन्हें शराब के नशे की आदत है. 

जिन्हें देश भक्ति का नशा है वो देश के लिए अपनी जान देने को भी तैयार रहते हैं. कल सुबह जम्मू कश्मीर के हंदवाड़ा में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में भारतीय सेना के 4 जवानों और जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर के शहीद होने की खबर आई तो आज शाम होते-होते हंदवाड़ा और श्रीनगर में भी आतंकवादी हमलों की खबर आ गई. हंदवाड़ा में आतंकवादियों ने CRPF की टीम पर हमला किया जिसमें 3 जवान शहीद हो गए जबकि 6 जवान घायल हो गए. श्रीनगर के नौगाम में CISF की एक पेट्रोल पार्टी पर भी आतंकवादियों ने हमला किया जिसमें 1 जवान के घायल होने की खबर है. (खबर लिखे जाने तक की जानकारी)

भारत में करीब साढ़े 14 लाख सैनिक हैं. सेना में भर्ती से पहले इन जवानों को लिखित और शारीरिक परीक्षा देने के लिए लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ता है. कोई भी सैनिक शहादत को अपने परिश्रम का सबसे बड़ा पुरस्कार मानता है. अवसर आने पर यही सैनिक सारी लाइनें तोड़कर मौत के सामने सीना तान कर खड़े हो जाते हैं. ये ऐसा इसलिए करते हैं ताकि आप और हम अपने घरों में सुरक्षित रह सकें.

इसके विपरित हमारे देश में करीब 16 करोड़ लोग ऐसे हैं. जो नियमित रूप से शराब पीते हैं. शराब पीना या ना पीना आपके ऊपर है, क्योंकि एक लोकतांत्रिक देश में सब अपने-अपने तरीके से अपना जीवन जीने के लिए स्वतंत्र हैं. आज आपने दिन भर लाइन तोड़कर शराब खरीदते हुए लोगों की तस्वीरें देखी होंगी. जिन्हें शराब मिल गई वो खुद को भाग्यशाली समझ रहे थे और ऐसा लग रहा था जैसे इन्होंने कोई युद्ध जीत लिया हो. लेकिन आज हम आपको लाइन तोड़कर आतंकवादियों से टकराने वाले उन वीर जवानों की कहानी बताएंगे जो हर दिन एक युद्ध लड़ते हैं, अपनी जान की बाजी लगाते हैं और सीने पर लगी दुश्मन की गोली को अपना सौभाग्य समझते हैं.

जम्मू कश्मीर के हंदवाड़ा में पिछले कुछ दिनों से सेना और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हो रही थी. करीब 4 दिनों तक चले इस एनकाउंटर के बाद दो आतंकवादी मारे गए जबकि भारतीय सेना के 4 जवान और जम्मू कश्मीर पुलिस का एक सब इंस्पेक्टर शहीद हो गया. 

शहीदों में 21 राष्ट्रीय राइफल के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा, कंपनी कमांडर मेजर अनुज सूद, नायक राजेश कुमार, और लांस नायक दिनेश सिंह शामिल थे. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर पुलिस के जांबाज सब इंस्पेक्टर सगीर अहमद काजी भी इस एनकाउंटर में शहीद हुए हैं.

संभव है कि ये सारे नाम आप कुछ दिनों के बाद भूल जाएंगे. देश की मीडिया में किसी और खबर पर चर्चा होने लगेगी, सोशल मीडिया पर नए-नए हैश टैग ट्रेंड करने लगेंगे और इन शहीदों का चेहरा किसी को याद नहीं रहेगा.

लेकिन आज हम फिल्मी नायकों को सुपर स्टार का दर्जा देने वाले इस देश को असली नायकों से मिलवाएंगे. भारतीय सेना के ये नायक किसी सुपर हीरो की ड्रेस नहीं पहनते, लेकिन इनके जज्बे और इनकी हिम्मत के सामने बड़े बड़े सुपर हीरोज की काल्पनिक कथाएं भी हल्की लगने लगती हैं.

जम्मू कश्मीर के हंदवाड़ा में हुए इस एनकाउंटर की शुरुआत गुरुवार को तब हो गई थी जब सेना को हंदवाड़ा के राजवड़ जंगलों में कुछ आतंकवादियों की मौजूदगी का पता चला. लेकिन तब ये आतंकवादी बचकर निकल गए.

इसके बाद शनिवार की दोपहर को आतंकवादियों के हंदवाड़ा के ही एक घर में छिपे होने की खबर मिली. इसके बाद कर्नल आशुतोष शर्मा ने इलाके में कॉर्डोन और सर्च ऑपरेशन का आदेश दिया और सेना ने स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया.

इसके बाद जिस घर में आतंकवादी छिपे हुए थे उस घर पर सेना की उस टीम ने हमला बोल दिया. जिसका नेतृत्व कर्नल आशुतोष कर रहे थे. भारी गोलीबारी के बीच सेना की ये टीम उस घर में ही फंस गई और टीम का संपर्क भी बाहर के लोगों से टूट गया.

इसके बाद शाम को बारिश होने लगी और फिर सेना को रात भर के लिए अपना ऑपरेशन रोकना पड़ा. रविवार को सुबह होते ही दो आतंकवादियों ने घर से भागने की कोशिश की और सेना ने दोनों आतंकवादियों को मार गिराया. जब घर की तलाशी ली गई तो पांचों शहीदों के शव भी वहीं मिले.

यानी जिस दौरान देश शराब की दुकानें खुलने का इंतजार कर रहा था, उस दौरान कुछ बहादुर सैनिक अपनी शहादत की कहानी लिख रहे थे.





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